Monday, July 5, 2010

स्मरण.......

विश्वास लेकर चली तू साथ मेरे,
सहेजते अब भी तेरी बांहों के घेरे,
स्मरण तेरा आते ही दीप सा तू तम हर ले।
भले ना तू मेरी बांह पकडे,
चाहे ना दुखो का भार हर ले,
स्मरण तेरा आते ही दीप सा तू तम हर ले।
गीत प्यार के सदा गुनगुनाये,
मेरे सूने जीवन को तू ही संजाये
स्मरण तेरा आते ही दीप सा तू तम हर ले।

1 comment:

  1. सुंदर भाव .. अच्‍छी अभिव्‍यक्ति !!

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