Thursday, July 22, 2010

विडम्बना

सब आते है मिलते है
हम खुश होते है
कुछ संभल पाए, वे हमें छोड़ जाते है।
सपने दिखाते है ख्वाब संजोते है
वादे निभाते भी है
खुश होना चाहे, ख्वाबो के घरोंदे तोड़ जाते है।
भाग्य समझ स्वीकारते है
बुरे स्वप्न सा भुलाते है,
नया मीत बनकर, फिर से दिल तोड़ जाते है ।
सब जानते है पहचानते है
अनजान नहीं इससे मगर
कुछ पल का सुख पाने को,टूट कर बिखर जाने को,
मुस्कराते है और वही राह चुन लेते है।

2 comments:

  1. एहसास की यह अभिव्यक्ति बहुत खूब

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