Monday, December 13, 2010

सपने

जिंदगी के दाँव-पेंचो से

लड़ते हुए थकहार से गए मेरे सपने

कुछ सपने टूटकर बिखर गए

तो कुछ जिंदगी का मजाक बन रह गए।

वक्त अपनी राह पकड़ चलता गया

गुजरते समय के साथ एक बार फिर से

मेरे सपनों को पंख मिले

वो आसमान में चाँद तारो को छूने लगे,

बिखरे हए मेरे सपने रंगों में सजने लगे।

साकार होने की तमन्ना लिए

मंजिल की तलाश मे निकल पड़े।

मेरे मासूम से खुबसुरत सपने !

एक बार फिर से मेरे नयनो की गोद में पलने लगे।

Thursday, October 14, 2010

अतीत

लोग कहते है अतीत को ढ़ोती हू मै,
जानते नहीं साथ अतीत तो जिन्दा हू मै।
भला छोड़ दू कैसे उसको मै ढ़ोना
जीवन सुना लगे मेरा उसके बिना
उसकी ही गोद में अतिशय सुख पाया
उपहार में मिले वियोग को भी अपनाया
लोग कहते है अतीत को ढ़ोती हू मै,
जानते नहीं साथ अतीत तो जिन्दा हू मै।

कभी तोड़ कर रख देता मुझे अतीत मेरा
आज मेरी हिम्मत भी तो वही बना
अतीत की नींव पर मेरा वर्तमान खड़ा
किस्सा कैसे ख़त्म करू इससे हर-पल जुड़ा
लोग कहते है अतीत को ढ़ोती हू मै,
जानते नहीं साथ अतीत तो जिन्दा हू मै।
जीवन में ख़ुशी छलकाता मधुर यादों से
कभी आंसू छलक आते किसी की याद में
यह सिलसिला तो बंधा मेरी सांसों की डोर से
ना भूल पाऊ बचा अब यही खजाना हाथ में

Friday, October 1, 2010

पागल हु में,

सब कहते थे पागल थी मै
और आज भी कहते है पागल हु मै,
अपने बारे मै नहीं सोचती
अपने लिए नहीं जीती
सबका का प्यार पाने को खुद को भूल जाती हु मै,
प्यार बांटो तो प्यार मिलेगा
प्यार से ही तो जीवन सजेगा
परायों के बिछड़ जाने पर भी विचलित हो जाती हु मै,
सोचो अगर यह प्यार न होता
अकेलेपन का ही आज एकाधिकार होता
अपने उन्ही पराये रिश्तो से खुशिया पा लेती हु मै,

Monday, July 26, 2010

दोस्त

होठों पर मुस्कान ले आये वो लम्हा हो।
काँटों को संग ले जो खिलता गुलाब हो।
अंधेरों से मोहब्बत करता वो चाँद हो।
सुखी जमीं को हर्षाये बरखा की फुहार हो।
मन के अंधेरों को जो हर ले जगमगाता दीप हो।
जिंदगी को नव-जीवन देते वो अमृत तुम हो।

Thursday, July 22, 2010

विडम्बना

सब आते है मिलते है
हम खुश होते है
कुछ संभल पाए, वे हमें छोड़ जाते है।
सपने दिखाते है ख्वाब संजोते है
वादे निभाते भी है
खुश होना चाहे, ख्वाबो के घरोंदे तोड़ जाते है।
भाग्य समझ स्वीकारते है
बुरे स्वप्न सा भुलाते है,
नया मीत बनकर, फिर से दिल तोड़ जाते है ।
सब जानते है पहचानते है
अनजान नहीं इससे मगर
कुछ पल का सुख पाने को,टूट कर बिखर जाने को,
मुस्कराते है और वही राह चुन लेते है।

मीत

मै अकेली तो नहीं थी कभी
फिर छोड़ गए क्यो मीत सभी
ऐसी चली वो गम भरी आंधी
बचा ना मेरा अपना कोई साथी
हुआ क्या हमसे ऐसा गुनाह
छुट गया हमारा प्रेम अथाह
मिली न दिल को कही पनाह
अकेले रह गए हम अपनी राह

Monday, July 5, 2010

स्मरण.......

विश्वास लेकर चली तू साथ मेरे,
सहेजते अब भी तेरी बांहों के घेरे,
स्मरण तेरा आते ही दीप सा तू तम हर ले।
भले ना तू मेरी बांह पकडे,
चाहे ना दुखो का भार हर ले,
स्मरण तेरा आते ही दीप सा तू तम हर ले।
गीत प्यार के सदा गुनगुनाये,
मेरे सूने जीवन को तू ही संजाये
स्मरण तेरा आते ही दीप सा तू तम हर ले।

मेरे अकेलेपन !

आ गले लग जा मेरे अकेलेपन !
दिन पर दिन जायेगे, बीतेगा ऐसे ही जीवन।
आकाश को एक-टक निहारते बीतती सारी रात।
याद आये पल-पल तेरी कही हर एक बात।
ढलते सूरज सा डूबता जाय मेरा ये मन।
जिन्दा लाश की तरह चलता जाए मेरा जीवन।
आ गले लग जा मेरे अकेलेपन !
मेरे हृदय को सुलगाये जुदाई की तपन।
मन की पीर ना दूर हो करू चाहे सौ जतन।
दिन-दिन बढती ही जाए तुझसे मिलने की लगन।
जागते है सारी रात - मै और मेरे यह दो नयन।
आ गले लग जा मेरे अकेलेपन !
दिन पर दिन जायेगे, बीतेगा ऐसे ही जीवन।

Wednesday, April 14, 2010

वह घर आया है

कई दिनों के बाद वह घर आया है।
अहसास न हो उसको वह पराया है।
लगाते हो आरोप की वह गुनहगार है।
सच कहो इसके लिए कौन नहीं जिम्मेदार है।
गुनाह तो उसके सब दिखाई पड़ते है।
क्यो करता गया क्या कोई समझता है।
फैलाकर अपनी बाहों को छुपा लो दामन मे।
सुबह का भुला साँझ को घर अपने आया है।
अहसास न हो उसको की अब वह पराया है।

Monday, March 29, 2010

ऐ जिंदगी

ऐ जिंदगी अब ना बैठुगी मै थकहार
मेहनत के फूलों से,
हिम्मत के रंगों से,
सजाउंगी अपनी किस्मत फिर से एक बार।
अनजान डगर है,
रास्ते मुश्किल है,
पर पाने को मंझिल अपनी मै अब तैयार।
आंसू मेरे है हंसी मेरी,
कभी गम तो ख़ुशी मेरी,
लेकर साथ इन्हे अपने निकल पड़ी मै अपनी राह।
ऐ जिंदगी अब ना बैठुगी मै थकहार