सब कहते थे पागल थी मै
और आज भी कहते है पागल हु मै,
अपने बारे मै नहीं सोचती
अपने लिए नहीं जीती
सबका का प्यार पाने को खुद को भूल जाती हु मै,
प्यार बांटो तो प्यार मिलेगा
प्यार से ही तो जीवन सजेगा
परायों के बिछड़ जाने पर भी विचलित हो जाती हु मै,
सोचो अगर यह प्यार न होता
अकेलेपन का ही आज एकाधिकार होता
अपने उन्ही पराये रिश्तो से खुशिया पा लेती हु मै,
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बहुत सुन्दर कविता है RAMA JI
ReplyDeleteबहुत अच्छी कविता|
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