झूठों का बोलबाला, होती है जय-जयकार
सच्चाई दम तोड़ती है।
अनीति का चलता सिक्का, फैला है भ्रष्टाचार
राजनीति पाँव जमाती है।
आतंक से फैला सन्नाटा, गूंज रही चीत्कार
आम आदमी मरता है।
लेन-देन का होता, अजब यहाँ व्यापार
दुल्हेँ बाजार में बिकते है।
माँ की बेबस ममता, बाप होता है लाचार
औलाद घर अलग बसाती है।
कैसा कलयुग आया, बदल गया संसार
जीत पापी की होती है।
Paap ki jeet kabhi nahi hoti... Isiliye duniya chalati hai...
ReplyDelete