Wednesday, February 18, 2009

फागुन आया है

प्रियतम को भेज दो संदेश,
सखी ! फागुन आया है।
बौरों से भर गई अमवा की डार,
खेतों में छाई पीली सरसों की बहार।
सखी ! फागुन आया है।
रतनारे केसू के फूलों से वन हरषाए,
बांगो में कोयल ने मीठे गीत सुनाए।
सखी ! फागुन आया है।
लाल-गुलाबी, नीले-पीले रंग उडे है,
मद-मस्त हुए सब होली की धूम मची है।
सखी ! फागुन आया है।
शीतल-मंद- सुगन्धित समीर बहे चहु ओर,
सारा आलम झूम उठा नाचे मन मयूरा चितचोर।
प्रियतम को भेज दो संदेश,
सखी ! फागुन आया है।


No comments:

Post a Comment