होठों पर मुस्कान ले आये वो लम्हा हो।
काँटों को संग ले जो खिलता गुलाब हो।
अंधेरों से मोहब्बत करता वो चाँद हो।
सुखी जमीं को हर्षाये बरखा की फुहार हो।
मन के अंधेरों को जो हर ले जगमगाता दीप हो।
जिंदगी को नव-जीवन देते वो अमृत तुम हो।
Monday, July 26, 2010
Thursday, July 22, 2010
विडम्बना
सब आते है मिलते है
हम खुश होते है
कुछ संभल पाए, वे हमें छोड़ जाते है।
सपने दिखाते है ख्वाब संजोते है
वादे निभाते भी है
खुश होना चाहे, ख्वाबो के घरोंदे तोड़ जाते है।
भाग्य समझ स्वीकारते है
बुरे स्वप्न सा भुलाते है,
नया मीत बनकर, फिर से दिल तोड़ जाते है ।
सब जानते है पहचानते है
अनजान नहीं इससे मगर
कुछ पल का सुख पाने को,टूट कर बिखर जाने को,
मुस्कराते है और वही राह चुन लेते है।
हम खुश होते है
कुछ संभल पाए, वे हमें छोड़ जाते है।
सपने दिखाते है ख्वाब संजोते है
वादे निभाते भी है
खुश होना चाहे, ख्वाबो के घरोंदे तोड़ जाते है।
भाग्य समझ स्वीकारते है
बुरे स्वप्न सा भुलाते है,
नया मीत बनकर, फिर से दिल तोड़ जाते है ।
सब जानते है पहचानते है
अनजान नहीं इससे मगर
कुछ पल का सुख पाने को,टूट कर बिखर जाने को,
मुस्कराते है और वही राह चुन लेते है।
मीत
मै अकेली तो नहीं थी कभी
फिर छोड़ गए क्यो मीत सभी
ऐसी चली वो गम भरी आंधी
बचा ना मेरा अपना कोई साथी
हुआ क्या हमसे ऐसा गुनाह
छुट गया हमारा प्रेम अथाह
मिली न दिल को कही पनाह
अकेले रह गए हम अपनी राह
फिर छोड़ गए क्यो मीत सभी
ऐसी चली वो गम भरी आंधी
बचा ना मेरा अपना कोई साथी
हुआ क्या हमसे ऐसा गुनाह
छुट गया हमारा प्रेम अथाह
मिली न दिल को कही पनाह
अकेले रह गए हम अपनी राह
Monday, July 5, 2010
स्मरण.......
विश्वास लेकर चली तू साथ मेरे,
सहेजते अब भी तेरी बांहों के घेरे,
स्मरण तेरा आते ही दीप सा तू तम हर ले।
भले ना तू मेरी बांह पकडे,
चाहे ना दुखो का भार हर ले,
स्मरण तेरा आते ही दीप सा तू तम हर ले।
गीत प्यार के सदा गुनगुनाये,
मेरे सूने जीवन को तू ही संजाये
स्मरण तेरा आते ही दीप सा तू तम हर ले।
सहेजते अब भी तेरी बांहों के घेरे,
स्मरण तेरा आते ही दीप सा तू तम हर ले।
भले ना तू मेरी बांह पकडे,
चाहे ना दुखो का भार हर ले,
स्मरण तेरा आते ही दीप सा तू तम हर ले।
गीत प्यार के सदा गुनगुनाये,
मेरे सूने जीवन को तू ही संजाये
स्मरण तेरा आते ही दीप सा तू तम हर ले।
मेरे अकेलेपन !
आ गले लग जा मेरे अकेलेपन !
दिन पर दिन जायेगे, बीतेगा ऐसे ही जीवन।
आकाश को एक-टक निहारते बीतती सारी रात।
याद आये पल-पल तेरी कही हर एक बात।
ढलते सूरज सा डूबता जाय मेरा ये मन।
जिन्दा लाश की तरह चलता जाए मेरा जीवन।
आ गले लग जा मेरे अकेलेपन !
मेरे हृदय को सुलगाये जुदाई की तपन।
मन की पीर ना दूर हो करू चाहे सौ जतन।
दिन-दिन बढती ही जाए तुझसे मिलने की लगन।
जागते है सारी रात - मै और मेरे यह दो नयन।
आ गले लग जा मेरे अकेलेपन !
दिन पर दिन जायेगे, बीतेगा ऐसे ही जीवन।
दिन पर दिन जायेगे, बीतेगा ऐसे ही जीवन।
आकाश को एक-टक निहारते बीतती सारी रात।
याद आये पल-पल तेरी कही हर एक बात।
ढलते सूरज सा डूबता जाय मेरा ये मन।
जिन्दा लाश की तरह चलता जाए मेरा जीवन।
आ गले लग जा मेरे अकेलेपन !
मेरे हृदय को सुलगाये जुदाई की तपन।
मन की पीर ना दूर हो करू चाहे सौ जतन।
दिन-दिन बढती ही जाए तुझसे मिलने की लगन।
जागते है सारी रात - मै और मेरे यह दो नयन।
आ गले लग जा मेरे अकेलेपन !
दिन पर दिन जायेगे, बीतेगा ऐसे ही जीवन।
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