Wednesday, March 18, 2009

माँ

ईश्वर जब अकेले न सबको संभाल पाया।
उसके मन में भी मदद का खयाल आया।
हर परिवार में अपना प्रतिरूप माँ को बनाया।
जन्म लेते ही ज़ुबां पर सबकी नाम माँ आया।
कई रातों तक स्वयं जाग जिसने हमें सुलाया।
अपने बच्चों की पीडा पर पीड़ित हो दिल रोया।
अपनी आँखों से जिसने दुनिया को हमें दिखाया।
क्या अच्छा क्या बुरा इसका माँ ने ज्ञान कराया।
प्रतिपल मार्ग-दर्शन कर जिसने हौसला बढ़ाया।
माँ के आँचल की छाया में संसार सिमट आया।
पाने माँ का प्यार ईश्वर धरती पर जन्म ले आया
माँ के चरणों में शीश झुका अतिशय सुख पाया

1 comment:

  1. Very good!!! I have written something on mother on http://relate-n-ship.blogspot.com/

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