Thursday, March 5, 2009

चाह

तेरे बिन जीना है बड़ा मुश्किल
सिर्फ यही बात कहना चाहती हूँ।

ख्वाबों में तो मिलते हो हर दिन
हकीकत में मिलना चाहती हूँ।
बहुत जाग चुकी तेरी यादों में
तेरी बांहों में सोना चाहती हूँ।

किताबों के पलटते पन्नों की तरह
अपनी किस्मत बदलना चाहती हूँ।
तेरे साथ बिताये थे जो खुशनुमा पल
उन्हें फिर से लौटा लाना चाहती हूँ।
बढ़ जाता जब जुदाई का दर्द इस कदर
जीना नहीं, मर जाना चाहती हूँ.

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