Wednesday, March 4, 2009

तुम आते हो..

जब तुम आते हो मैँ दीवानी हो जाती हूँ।
पाते ही तुमको ख़ुद से बेगानी हो जाती हूँ।
तेरे नैनों में खोकर प्रेम मग्न हो जाती हूँ।
तेरी बांहों में अतिशय सुख पा जाती हूँ ।
स्पर्श तेरा पाते ही कलियों सी खिल जाती हूँ।
ख्वाबों के आँगन में सपनों के दीप जलाती हूँ।
ह्रदय के झंकृत तारों से प्रेम का साज सजाती हूँ।
तेरे सजदे में अपना सर्वस्व अर्पण कर जाती हूँ।


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