सीखे थे चलना जीवन में जिन हाथो को पकडे,
अब उन हाथों को देने सहारा,एक बार लौट आओ।
बिन कुछ कहे मासूम ढूढ़ते तुमको जंहा में,
करने उनकी साकार तमन्ना,एक बार लौट आओ।
अधूरे रखे है काम जो तुम छोड़ गए थे,
करने को पुरा उन्हें,एक बार लौट आओ।
संजाये थे जो सपने संग तुमने और मैंने
सपनों को अपने संजोने, एक बार लौट आओ।
तुमने जो किए थे मुझसे हजारों वादे ,
वादों को निभाने,एक बार लौट आओ।
इंतजार में तुम्हारे द्वार पर लगी मेरी निगाहे,
करने को खत्म मेरी प्रतीक्षा,एक बार लौट आओ।
जीवन लगता नीरस बेरंग जिंदगी बिन तेरे,
ले लो मेरी उमर रंग भरने,एक बार लौट आओ।
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.....shyad iski gehrai ko main shabdo main bayain na kar saku...
ReplyDeleteout of words......wonderful
ReplyDeleteur all poems r very good...keep writing..