बारिश हो रही थी जोरों से,
घर जाने की भी जल्दी,पर जाए कैसे
छाता अपना लेकर आना जो हम भूल गए।
उलझन में थे हम तभी आवाज आई
अरे! आप गई नहीं काफी देर हो गई।
देख सहकर्मी को अपने कहा- छाता नहीं लाये।
भीग जायेगे बारिश में इस डर से
कर रहे है इंतजार इसके रुकने का
थम जाय जो यह बरसात तो हम घर जाए।
हम लेकर आये है छाता अपना
लाकर देते है हम उसे ले जाए आप
मुस्कराते हुए महाशय अपना छाता ले आये।
समस्या का हमारी समाधान मिल गया
धन्यवाद दे उनको हमने छाता लिया
खोलकर छाता, खुश होते हुए घर को चल दिए।
पंहुच कर घर उसे बंद करना चाहा
किए बहुत जतन,पर नाकाम हुई कोशिश
छाता ऐसा की जैसे ठान लिया बंद होना ना चाहे।
ऑफिस से घर तक ली हमने सबसे मदद
सबने कहा-माफ करना नहीं कर पाए बंद
खुला छाता लेकर हम उन्ही महाशय के पास आये।
आपके छाते से हमको मिली बहुत मदद
पर सच कहे बन गया यह हमारे लिए सर-दर्द
लौटा रहे सधन्यवाद, माफ़ करना बंद नहीं कर पाए।
सादगी से महाशय बोले- करने का तरीका थाअलग
करने से उस तरह हो जाता आसानी से बंद
गल्ती हुई हमसे बड़ी आपको बताना भूल गए।
हम मुस्कराए गल्ती आपसे नहीं हुई हमसे
जो कंप्यूटर इंजिनियर का है यह छाता
जानकर भी आपसे पासवर्ड लेना भूल गए।
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