जुदाई से तेरी हम टूट कर रह गए।
हम बड़े ही असहाय होकर जी रहे।
अंजान थे हम तन्हाई से पहले मगर।
आज तन्हाई से इस कदर रूबरू हो लिए।
तन्हाई हमारी मेहमान बनकर रह गई।
सहने की तन्हाई हमारी आदत बन गई।
तन्हाई के साये में हम अपने से भी दूर हो गए।
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