Thursday, July 9, 2009

छाता कंप्यूटर इंजिनियर का

बारिश हो रही थी जोरों से,
घर जाने की भी जल्दी,पर जाए कैसे
छाता अपना लेकर आना जो हम भूल गए।
उलझन में थे हम तभी आवाज आई
अरे! आप गई नहीं काफी देर हो गई।
देख सहकर्मी को अपने कहा- छाता नहीं लाये।
भीग जायेगे बारिश में इस डर से
कर रहे है इंतजार इसके रुकने का
थम जाय जो यह बरसात तो हम घर जाए।
हम लेकर आये है छाता अपना
लाकर देते है हम उसे ले जाए आप
मुस्कराते हुए महाशय अपना छाता ले आये।
समस्या का हमारी समाधान मिल गया
धन्यवाद दे उनको हमने छाता लिया
खोलकर छाता, खुश होते हुए घर को चल दिए।
पंहुच कर घर उसे बंद करना चाहा
किए बहुत जतन,पर नाकाम हुई कोशिश
छाता ऐसा की जैसे ठान लिया बंद होना ना चाहे।
ऑफिस से घर तक ली हमने सबसे मदद
सबने कहा-माफ करना नहीं कर पाए बंद
खुला छाता लेकर हम उन्ही महाशय के पास आये।
आपके छाते से हमको मिली बहुत मदद
पर सच कहे बन गया यह हमारे लिए सर-दर्द
लौटा रहे सधन्यवाद, माफ़ करना बंद नहीं कर पाए।
सादगी से महाशय बोले- करने का तरीका थाअलग
करने से उस तरह हो जाता आसानी से बंद
गल्ती हुई हमसे बड़ी आपको बताना भूल गए।
हम मुस्कराए गल्ती आपसे नहीं हुई हमसे
जो कंप्यूटर इंजिनियर का है यह छाता
जानकर भी आपसे पासवर्ड लेना भूल गए।


Friday, July 3, 2009

तन्हाई

जुदाई से तेरी हम टूट कर रह गए।

हम बड़े ही असहाय होकर जी रहे।

अंजान थे हम तन्हाई से पहले मगर।

आज तन्हाई से इस कदर रूबरू हो लिए।

तन्हाई हमारी मेहमान बनकर रह गई।

सहने की तन्हाई हमारी आदत बन गई।

तन्हाई के साये में हम अपने से भी दूर हो गए।

Wednesday, July 1, 2009

जीत का उपहार

बुलंद इरादे कर हर कदम बढ़ाना,
मंजिल हरदम पास है।
राह में मुश्किलों से न घबराना,
हिम्मत का अहसास है।
नामुमकिन कोई काम नही अगर,
कर जाने की चाह है।
परिश्रम से सपनों का भवन बनाना,
भाग्य भी देता साथ है।
मेहनत, लगन ,दृढ़-निश्चय जिसके साथी,
मिलता जीत का उपहार है।