समन्दर की गहराईयों से गहरी,
सीप के मोती सी सच्ची है यह दोस्ती।
आसमाँ की ऊचाईयों से कई ऊची,
प्रेम- विश्वास का दूसरा नाम है दोस्ती।
संसार का सबसे हँसी जज्बात ,
शायर की गज़ल कवि की कविता है दोस्ती।
झील में खिलता हुआ कमल,
चमन को महकाती सी खुशबू है दोस्ती,
मोहब्बत से भी प्यारी,
सच्चे ईश्वर का प्रतिरूप है पाक-दोस्ती।
नफरत को स्वयं में समा लेती,
नफरत से भी नफरत ना करे प्यारी सी दोस्ती।
भगवान का मिला वरदान,
जिंदगी बनती जन्नत जो मिल जाय सच्ची-दोस्ती।
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Phir se bahut hi umda. Likhte raho bahut saari aise kavita hamesha.....
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