समन्दर की गहराईयों से गहरी,
सीप के मोती सी सच्ची है यह दोस्ती।
आसमाँ की ऊचाईयों से कई ऊची,
प्रेम- विश्वास का दूसरा नाम है दोस्ती।
संसार का सबसे हँसी जज्बात ,
शायर की गज़ल कवि की कविता है दोस्ती।
झील में खिलता हुआ कमल,
चमन को महकाती सी खुशबू है दोस्ती,
मोहब्बत से भी प्यारी,
सच्चे ईश्वर का प्रतिरूप है पाक-दोस्ती।
नफरत को स्वयं में समा लेती,
नफरत से भी नफरत ना करे प्यारी सी दोस्ती।
भगवान का मिला वरदान,
जिंदगी बनती जन्नत जो मिल जाय सच्ची-दोस्ती।
Friday, May 29, 2009
Thursday, May 14, 2009
साथ
सब अपनी जगह बस एक तुम ही नहीं साथ।
सूरज आता नित अपनी स्वर्णिम किरणों के साथ।
चाँद खिलता सदा शीतल चाँदनी की आभा के साथ।
आसमान को भी मिलता झिलमिल सितारों का साथ।
सब अपनी जगह बस एक तुम ही नहीं साथ।
फूल महकते हर पल रंग-बिरंगी तितलियों के साथ।
काली-घटाए बरसती जगमगाती बिजलियों के साथ।
प्रकृति भी करती नव-श्रृंगार पाकर मौसम का साथ।
सब अपनी जगह बस एक तुम ही नहीं साथ
सवेरा होता मन्दिर की सुमधुर घंटियों की ध्वनी के साथ।
साँझ ढलती लौटती गायों के घुंघरु की आवाज के साथ।
हर पल को भी मिलता नव-सपनों की संरचना का साथ।
सब अपनी जगह बस एक तुम ही नहीं साथ।
सूरज आता नित अपनी स्वर्णिम किरणों के साथ।
चाँद खिलता सदा शीतल चाँदनी की आभा के साथ।
आसमान को भी मिलता झिलमिल सितारों का साथ।
सब अपनी जगह बस एक तुम ही नहीं साथ।
फूल महकते हर पल रंग-बिरंगी तितलियों के साथ।
काली-घटाए बरसती जगमगाती बिजलियों के साथ।
प्रकृति भी करती नव-श्रृंगार पाकर मौसम का साथ।
सब अपनी जगह बस एक तुम ही नहीं साथ
सवेरा होता मन्दिर की सुमधुर घंटियों की ध्वनी के साथ।
साँझ ढलती लौटती गायों के घुंघरु की आवाज के साथ।
हर पल को भी मिलता नव-सपनों की संरचना का साथ।
सब अपनी जगह बस एक तुम ही नहीं साथ।
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