Wednesday, April 8, 2009

दरमियाँ

तेरे मेरे दरमियाँ जन्म-मरण के फासले है।
जिधर देखती हू मुश्किलें ही मुश्किलें है।
अपने संग होकर भी अब बेगाने लगते है।
जिंदगी के सब रास्ते बिन तेरे मायूस है।
मर सी गई जैसे जीवन की हर तमन्ना है।
दुनिया की इस भीड़ में भी हम तन्हां है।
हाल क्या होंगा तेरा फिक्र मुझे सताती है।
खोकर तेरे खयालों में तन्हा राते कट जाती है।

2 comments:

  1. तेरे मेरे दरमियाँ जन्म-मरण के फासले है।
    जिधर देखती हू मुश्किलें ही मुश्किलें है।
    अपने संग होकर भी अब बेगाने लगते है।
    जिंदगी के सब रास्ते बिन तेरे मायूस है।
    मर सी गई जैसे जीवन की हर तमन्ना है।
    दुनिया की इस भीड़ में भी हम तन्हां है।
    हाल क्या होंगा तेरा फिक्र मुझे सताती है।

    वाह जी वाह बहुत ही खुबसूरत लिखा है आपने बधाई के काबिल है आपकी कविता

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