Tuesday, April 9, 2019

जिंदगी मेरी

सजती थी सदा मेरे होंठो पर वो अल्हड़ सी हँसी ,
ज़रा ज़रा सी बातों में आंखों में नाराज़गी,
चमकती थी सदा चेहरें पर खुशियाँ मेरी।
ना तुझसे क़भी दूर जाऊ थी चाहत मेरी ,
एक तेरा साथ ही तो था ज़िन्दग़ी मेरी ,
हर दर्द भूल जाती थी आकर तेरी बाहों में ,
ग़म -ए -दौर ऐसा आया ज़िन्दगी में ,
छोड़ गया मुझे तन्हा तू अंधेरों में,
टूटा आशियाना खुशियाँ डूबी आँसुओ में ,
कमी रह गयी होगी शायद मेरी बन्दगी में। 

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