Monday, December 13, 2010

सपने

जिंदगी के दाँव-पेंचो से

लड़ते हुए थकहार से गए मेरे सपने

कुछ सपने टूटकर बिखर गए

तो कुछ जिंदगी का मजाक बन रह गए।

वक्त अपनी राह पकड़ चलता गया

गुजरते समय के साथ एक बार फिर से

मेरे सपनों को पंख मिले

वो आसमान में चाँद तारो को छूने लगे,

बिखरे हए मेरे सपने रंगों में सजने लगे।

साकार होने की तमन्ना लिए

मंजिल की तलाश मे निकल पड़े।

मेरे मासूम से खुबसुरत सपने !

एक बार फिर से मेरे नयनो की गोद में पलने लगे।

1 comment:

  1. sapno se hi to jndgi ko udan milti hai..
    sapne kabhi tootte hain to naye sapno ko janm de jate hain..

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