लोग कहते है अतीत को ढ़ोती हू मै,
जानते नहीं साथ अतीत तो जिन्दा हू मै।
भला छोड़ दू कैसे उसको मै ढ़ोना
जीवन सुना लगे मेरा उसके बिना
उसकी ही गोद में अतिशय सुख पाया
उपहार में मिले वियोग को भी अपनाया
लोग कहते है अतीत को ढ़ोती हू मै,
जानते नहीं साथ अतीत तो जिन्दा हू मै।
कभी तोड़ कर रख देता मुझे अतीत मेरा
आज मेरी हिम्मत भी तो वही बना
अतीत की नींव पर मेरा वर्तमान खड़ा
किस्सा कैसे ख़त्म करू इससे हर-पल जुड़ा
लोग कहते है अतीत को ढ़ोती हू मै,
जानते नहीं साथ अतीत तो जिन्दा हू मै।
जीवन में ख़ुशी छलकाता मधुर यादों से
कभी आंसू छलक आते किसी की याद में
यह सिलसिला तो बंधा मेरी सांसों की डोर से
ना भूल पाऊ बचा अब यही खजाना हाथ में
Thursday, October 14, 2010
Friday, October 1, 2010
पागल हु में,
सब कहते थे पागल थी मै
और आज भी कहते है पागल हु मै,
अपने बारे मै नहीं सोचती
अपने लिए नहीं जीती
सबका का प्यार पाने को खुद को भूल जाती हु मै,
प्यार बांटो तो प्यार मिलेगा
प्यार से ही तो जीवन सजेगा
परायों के बिछड़ जाने पर भी विचलित हो जाती हु मै,
सोचो अगर यह प्यार न होता
अकेलेपन का ही आज एकाधिकार होता
अपने उन्ही पराये रिश्तो से खुशिया पा लेती हु मै,
और आज भी कहते है पागल हु मै,
अपने बारे मै नहीं सोचती
अपने लिए नहीं जीती
सबका का प्यार पाने को खुद को भूल जाती हु मै,
प्यार बांटो तो प्यार मिलेगा
प्यार से ही तो जीवन सजेगा
परायों के बिछड़ जाने पर भी विचलित हो जाती हु मै,
सोचो अगर यह प्यार न होता
अकेलेपन का ही आज एकाधिकार होता
अपने उन्ही पराये रिश्तो से खुशिया पा लेती हु मै,
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