Monday, March 29, 2010

ऐ जिंदगी

ऐ जिंदगी अब ना बैठुगी मै थकहार
मेहनत के फूलों से,
हिम्मत के रंगों से,
सजाउंगी अपनी किस्मत फिर से एक बार।
अनजान डगर है,
रास्ते मुश्किल है,
पर पाने को मंझिल अपनी मै अब तैयार।
आंसू मेरे है हंसी मेरी,
कभी गम तो ख़ुशी मेरी,
लेकर साथ इन्हे अपने निकल पड़ी मै अपनी राह।
ऐ जिंदगी अब ना बैठुगी मै थकहार

3 comments:

  1. बहुत दिनों बाद इतनी बढ़िया कविता पड़ने को मिली.... गजब का लिखा है

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  2. well....ur strength is commendable..mami ji well written...

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  3. very much inspiring Rama...keep this spirit on always...god bless u..

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