Thursday, July 2, 2020
Thursday, August 8, 2019
पापा याद बहुत आते हैं
माँ बुलाती है घर आने को
भाई इंतज़ार करते है मेरे आने का
कैसे बताऊ उन्हें ...........
आती हू जब घर, पापा बहुत याद आते हैं।
वो कमरा जिसमें घण्टों समय निकल जाता
लेकिन उनकी बातें खत्म ही नहीं होती थीं।
मेरे आते ही जाने का समय जान लेते मानो
उस समय में वो अपना दिल खोलकर रख देंगे
मेरे सामने ...........
और जब निकलने लगती तो महसूस करती
मानो कहना चाहते है कुछ देर और रुक जाती।
जब घर आती हु अब तो वो कमरा बुलाता है मुझे
खोजती है मेरी आँखे पापा को घर के हर कोने में
सुनना चाहती हु उनकी बातें जो ख़तम ही ना हो।
मन करता है रुक जाऊ कुछ देर वही
लेकिन एक सन्नाटा मेरे दिल को चीर जाता हैं।
दिल चाहता है बहुत जोर जोर से रोऊ
और मन हल्का कर लूँ अपना
पर याद आता है, पापा कहते थे तेरी आँख में
आंसू नहीं देख सकता हु मैं.
इन आँसुओ को तो आज भी रोक लेती हु मैं
पर पापा की याद को नहीं रोक पाती, बहुत याद आते हैं.
मेरे पापा ...........
भाई इंतज़ार करते है मेरे आने का
कैसे बताऊ उन्हें ...........
आती हू जब घर, पापा बहुत याद आते हैं।
वो कमरा जिसमें घण्टों समय निकल जाता
लेकिन उनकी बातें खत्म ही नहीं होती थीं।
मेरे आते ही जाने का समय जान लेते मानो
उस समय में वो अपना दिल खोलकर रख देंगे
मेरे सामने ...........
और जब निकलने लगती तो महसूस करती
मानो कहना चाहते है कुछ देर और रुक जाती।
जब घर आती हु अब तो वो कमरा बुलाता है मुझे
खोजती है मेरी आँखे पापा को घर के हर कोने में
सुनना चाहती हु उनकी बातें जो ख़तम ही ना हो।
मन करता है रुक जाऊ कुछ देर वही
लेकिन एक सन्नाटा मेरे दिल को चीर जाता हैं।
दिल चाहता है बहुत जोर जोर से रोऊ
और मन हल्का कर लूँ अपना
पर याद आता है, पापा कहते थे तेरी आँख में
आंसू नहीं देख सकता हु मैं.
इन आँसुओ को तो आज भी रोक लेती हु मैं
पर पापा की याद को नहीं रोक पाती, बहुत याद आते हैं.
मेरे पापा ...........
Tuesday, April 9, 2019
दोस्ती
ऐ दोस्त !!!
क्यों ये दिल तुझे इतना चाहता है,
जबकि हर बार इसे तू ही तोड़ जाता हैं।
हर बार होता है सवेरा एक नयी आस से ,
और दिन ढल जाता है तेरे साथ की उम्मीद में।
जानती हु हर मोड़ पर विश्वास कुचला जाता है,
फिर क्यों हर बार विश्वास करने को जी चाहता है।
दिल से लगाए बैठी हू दोस्ती को तेरी हे वो अनमोल,
होते देखती हू उसी दोस्ती को सरे-आम ज़ार ज़ार,
शक की बेड़ियों में बाँधी जाती वो बेबस बार बार।
कोनसी अग्नि-परीक्षा देकर यह बेदाग होगी ,
पतझड़ के बाद कब आएगी बसंत बहार की,
जब एक बार फिर हमारी दोस्ती ज़न्नत होगी।
जिंदगी मेरी
सजती थी सदा मेरे होंठो पर वो अल्हड़ सी हँसी ,
ज़रा ज़रा सी बातों में आंखों में नाराज़गी,
चमकती थी सदा चेहरें पर खुशियाँ मेरी।
ना तुझसे क़भी दूर जाऊ थी चाहत मेरी ,
एक तेरा साथ ही तो था ज़िन्दग़ी मेरी ,
हर दर्द भूल जाती थी आकर तेरी बाहों में ,
ग़म -ए -दौर ऐसा आया ज़िन्दगी में ,
छोड़ गया मुझे तन्हा तू अंधेरों में,
टूटा आशियाना खुशियाँ डूबी आँसुओ में ,
कमी रह गयी होगी शायद मेरी बन्दगी में।
ज़रा ज़रा सी बातों में आंखों में नाराज़गी,
चमकती थी सदा चेहरें पर खुशियाँ मेरी।
ना तुझसे क़भी दूर जाऊ थी चाहत मेरी ,
एक तेरा साथ ही तो था ज़िन्दग़ी मेरी ,
हर दर्द भूल जाती थी आकर तेरी बाहों में ,
ग़म -ए -दौर ऐसा आया ज़िन्दगी में ,
छोड़ गया मुझे तन्हा तू अंधेरों में,
टूटा आशियाना खुशियाँ डूबी आँसुओ में ,
कमी रह गयी होगी शायद मेरी बन्दगी में।
Monday, January 7, 2019
खालीपन के गीत
लिख डाले मन ने सुख और दुःख के गीत
लिखना चाहे आज मन खालीपन के गीत
जीत कर भी न भाये इस मन को कोई जीत
हर दिन हर पल याद आये प्रियतम तेरी प्रीत
मुस्कान की जगह आँखों में आँसू बन बहते नीर
सब कुछ लगता सुना सुना तुझ बिन मेरे मीत
विरहा की अग्नि में जलकर निखरी हमारी प्रीत
तब इस दिल को मैं समझाऊ प्रीत की यहीं है रीत
Friday, May 11, 2018
तुम मेरे हो
तुम हो मेरे आराध्य,मैं तुम्हारी पुजारिन हूँ।
तुम्हे बैठाकर मन मन्दिर में,बन्द कर लूँगी उसके द्वार।
छुपा लूँगी ज़माने से तुमको अपने आँचल में।
जहाँ चिन्ताओं की गर्म हवाएँ न तुमको छू पाएंगी।
और ना ही कोई ग़म तुम्हे दुःखी कर पायेगा।
कुछ पलों के लिए ही सही पर तुम।
खोकर मेरी प्रीत में शीतलता का सुख पाओगे।
पाकर संग तुम्हारा हर पल खिल सा जाता है।
स्नेह मिश्रित साथ बिताए पलों की स्मृतियाँ।
आँचल को मेरे अद्वितिय सुख से भर जाती हैं.
जब तक मैं हूँ ,तुम मेरे हो।
नहीं छीन सकता कोई तुमको तुम मेरी पूंजी हो।
तुम मेरे हो ! तुम मेरे हो ! हा..तुम मेरे हो !!!
तुम्हे बैठाकर मन मन्दिर में,बन्द कर लूँगी उसके द्वार।
छुपा लूँगी ज़माने से तुमको अपने आँचल में।
जहाँ चिन्ताओं की गर्म हवाएँ न तुमको छू पाएंगी।
और ना ही कोई ग़म तुम्हे दुःखी कर पायेगा।
कुछ पलों के लिए ही सही पर तुम।
खोकर मेरी प्रीत में शीतलता का सुख पाओगे।
पाकर संग तुम्हारा हर पल खिल सा जाता है।
स्नेह मिश्रित साथ बिताए पलों की स्मृतियाँ।
आँचल को मेरे अद्वितिय सुख से भर जाती हैं.
जब तक मैं हूँ ,तुम मेरे हो।
नहीं छीन सकता कोई तुमको तुम मेरी पूंजी हो।
तुम मेरे हो ! तुम मेरे हो ! हा..तुम मेरे हो !!!
Tuesday, January 16, 2018
मोहब्बत की है मैंने
तू मेरे पास नहीं फिर भी...
तेरी यादों से मोहब्ब्त की है मैंने।
जिनमें हो तेरी और मेरी बातें,
उन किस्सों से मोहब्बत की है मैंने।
जो महकते है तेरी यादों से,
उन पल से मोहब्बत की है मैंने।
तेरी जुदाई से जो मिला गम,
उस दर्द से मोहब्बत की है मैंने।
तेरी याद में जो छलक आये,
उन अश्कों से मोहब्बत की है मैंने।
तेरा अब मिलना किस्मत नहीं मेरी,
तेरे इन्तज़ार से मोहब्बत की है मैंने।
हा तुमसे ,तुमसे ही मोहब्बत की है मैंने
तेरी यादों से मोहब्ब्त की है मैंने।
जिनमें हो तेरी और मेरी बातें,
उन किस्सों से मोहब्बत की है मैंने।
जो महकते है तेरी यादों से,
उन पल से मोहब्बत की है मैंने।
तेरी जुदाई से जो मिला गम,
उस दर्द से मोहब्बत की है मैंने।
तेरी याद में जो छलक आये,
उन अश्कों से मोहब्बत की है मैंने।
तेरा अब मिलना किस्मत नहीं मेरी,
तेरे इन्तज़ार से मोहब्बत की है मैंने।
हा तुमसे ,तुमसे ही मोहब्बत की है मैंने
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