माँ बुलाती है घर आने को
भाई इंतज़ार करते है मेरे आने का
कैसे बताऊ उन्हें ...........
आती हू जब घर, पापा बहुत याद आते हैं।
वो कमरा जिसमें घण्टों समय निकल जाता
लेकिन उनकी बातें खत्म ही नहीं होती थीं।
मेरे आते ही जाने का समय जान लेते मानो
उस समय में वो अपना दिल खोलकर रख देंगे
मेरे सामने ...........
और जब निकलने लगती तो महसूस करती
मानो कहना चाहते है कुछ देर और रुक जाती।
जब घर आती हु अब तो वो कमरा बुलाता है मुझे
खोजती है मेरी आँखे पापा को घर के हर कोने में
सुनना चाहती हु उनकी बातें जो ख़तम ही ना हो।
मन करता है रुक जाऊ कुछ देर वही
लेकिन एक सन्नाटा मेरे दिल को चीर जाता हैं।
दिल चाहता है बहुत जोर जोर से रोऊ
और मन हल्का कर लूँ अपना
पर याद आता है, पापा कहते थे तेरी आँख में
आंसू नहीं देख सकता हु मैं.
इन आँसुओ को तो आज भी रोक लेती हु मैं
पर पापा की याद को नहीं रोक पाती, बहुत याद आते हैं.
मेरे पापा ...........
भाई इंतज़ार करते है मेरे आने का
कैसे बताऊ उन्हें ...........
आती हू जब घर, पापा बहुत याद आते हैं।
वो कमरा जिसमें घण्टों समय निकल जाता
लेकिन उनकी बातें खत्म ही नहीं होती थीं।
मेरे आते ही जाने का समय जान लेते मानो
उस समय में वो अपना दिल खोलकर रख देंगे
मेरे सामने ...........
और जब निकलने लगती तो महसूस करती
मानो कहना चाहते है कुछ देर और रुक जाती।
जब घर आती हु अब तो वो कमरा बुलाता है मुझे
खोजती है मेरी आँखे पापा को घर के हर कोने में
सुनना चाहती हु उनकी बातें जो ख़तम ही ना हो।
मन करता है रुक जाऊ कुछ देर वही
लेकिन एक सन्नाटा मेरे दिल को चीर जाता हैं।
दिल चाहता है बहुत जोर जोर से रोऊ
और मन हल्का कर लूँ अपना
पर याद आता है, पापा कहते थे तेरी आँख में
आंसू नहीं देख सकता हु मैं.
इन आँसुओ को तो आज भी रोक लेती हु मैं
पर पापा की याद को नहीं रोक पाती, बहुत याद आते हैं.
मेरे पापा ...........