लिख डाले मन ने सुख और दुःख के गीत
लिखना चाहे आज मन खालीपन के गीत
जीत कर भी न भाये इस मन को कोई जीत
हर दिन हर पल याद आये प्रियतम तेरी प्रीत
मुस्कान की जगह आँखों में आँसू बन बहते नीर
सब कुछ लगता सुना सुना तुझ बिन मेरे मीत
विरहा की अग्नि में जलकर निखरी हमारी प्रीत
तब इस दिल को मैं समझाऊ प्रीत की यहीं है रीत