Wednesday, April 14, 2010

वह घर आया है

कई दिनों के बाद वह घर आया है।
अहसास न हो उसको वह पराया है।
लगाते हो आरोप की वह गुनहगार है।
सच कहो इसके लिए कौन नहीं जिम्मेदार है।
गुनाह तो उसके सब दिखाई पड़ते है।
क्यो करता गया क्या कोई समझता है।
फैलाकर अपनी बाहों को छुपा लो दामन मे।
सुबह का भुला साँझ को घर अपने आया है।
अहसास न हो उसको की अब वह पराया है।