ऐ जिंदगी अब ना बैठुगी मै थकहार
मेहनत के फूलों से,
हिम्मत के रंगों से,
सजाउंगी अपनी किस्मत फिर से एक बार।
अनजान डगर है,
रास्ते मुश्किल है,
पर पाने को मंझिल अपनी मै अब तैयार।
आंसू मेरे है हंसी मेरी,
कभी गम तो ख़ुशी मेरी,
लेकर साथ इन्हे अपने निकल पड़ी मै अपनी राह।
ऐ जिंदगी अब ना बैठुगी मै थकहार
Monday, March 29, 2010
Subscribe to:
Comments (Atom)