Friday, December 4, 2009

मेरा ईश्वर

मन तू ढूढ़े ईश्वर को सारे जँहा में,
वो तो बसा हर एक-एक जगह में।
फूलो की महकती पंखुडियों में,
पौधों की नव -पल्लवित कोंपलो में,
खेतों की लहलहाती फसलों में,
वो तो बसा हर एक-एक जगह में।
बच्चों की निश्छल मुस्कान में,
किसी की पाक मोहब्बत में,
पराये दर्द से पीड़ित दिलों में,
वो तो बसा हर एक-एक जगह में।
ओंस की चमचमाती बूंदों में,
बारिश की पहली फुहार में,
मोसम के बदलते रूप में,
वो तो बसा हर एक-एक जगह में।