हँसना सीखा जिंदगी के मजाक पर,
सबकी खुशियाँ चाहती है वो।
जब अपना कोई दिल तोड़ कर जाता,
दो आँसू बहाकर रह जाती वो।
इम्तिहान ये जिंदगी के इतने लम्बे,
दे देकर उनको ना थकती वो,
छिन जाता अगर उसका सब कुछ,
चुपचाप देखा करती वो।
इंतजार के लम्हों की आदत बरसों से,
मिलन के सपने बुनती वो।
जीवन की राह सरल हो या हो मुश्किल,
हर-पल बढ़ती ना रुकती वो।
Wednesday, June 3, 2009
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